कल शाम से परेशान हूँ
यही तो रखी थी
जाने कहाँ खो गई है...
कल आखरी बार तुम्हारे साथ ही देखी थी
और जब तुम आओगे तो डांटोगे मुझे
कितनी बार कहा है कि मत उतारा करो
पहने रखा करो हमेशा
तुम मुस्कुराते हुए अच्छी लगती हो

achha likha hai rajni ji ....
ReplyDeleteshukriya xitija ji
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