Tuesday, October 12, 2010

"काश"


याद                
बस
एक लम्हा
गुज़ारा था तेरे साथ,
एक
भरी पूरी उम्र
कट गयी
उस लम्हे की
यादों के सहारे !
काश !
एक उम्र
तेरे साथ
गुजरने पाती..................!

6 comments:

  1. bilkul theek kaha aapne xitija ji,,,
    life goes on -:)

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  2. एक अच्छी कविता | जिंदगी क्या ,एक तपस्या | किसी नशीब-वाले को नशीब होते हैं ऐसे लम्हात और पूरी जिंदगी तो किसी खुश-नशीब के हिस्से आती है |

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  3. सार्थक और बेहद खूबसूरत,प्रभावी,उम्दा रचना है..शुभकामनाएं।

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  4. बहुत खूबसूरत ब्लॉग मिल गया, ढूँढने निकले थे। अब तो आते जाते रहेंगे।

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