"दिल" ये दिल कितना कुछ कहना चाहता है पर हम चाह कर भी कई बार इस दिल की बात नहीं सुन पाते ज़्यादातर हमारा दिमाग इस बेचारे दिल पर हावी रहता है और इस इंद्रधनुष के जो रंग कैनवस पर नहीं उतर वे अधूरे विचार वे बातें मस्तिष्क में उथल पुथल मचाते हैं पर बहार नहीं आ पाते.... ऐसी ही बाते जो हम सब करना चाहते हैं पर कर नहीं पाते... तो आइये हम सब मिलकर बाँटें अपने दिल का दर्द और कुछ अधूरी बातें.....
beautiful rajni ji... life goes on :)
ReplyDeletebilkul theek kaha aapne xitija ji,,,
ReplyDeletelife goes on -:)
एक अच्छी कविता | जिंदगी क्या ,एक तपस्या | किसी नशीब-वाले को नशीब होते हैं ऐसे लम्हात और पूरी जिंदगी तो किसी खुश-नशीब के हिस्से आती है |
ReplyDeleteshukriya darshan ji
ReplyDeleteसार्थक और बेहद खूबसूरत,प्रभावी,उम्दा रचना है..शुभकामनाएं।
ReplyDeleteबहुत खूबसूरत ब्लॉग मिल गया, ढूँढने निकले थे। अब तो आते जाते रहेंगे।
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