Wednesday, October 13, 2010

खुदखुशी

कल खिड़की से देखा..       
सूरज ने नदी मे डूब कर 
खुदखुशी कर ली 
फिर देखा उसी नदी से.. 
एक सफ़ेद साया उभर आया  
शायद सूरज का ही भूत था 
और लोग कहने लगे कि चाँद निकल आया है     

8 comments:

  1. hi rajani ji
    aap ki blog nice hai or rahi bat poetry lover ki to visit my blog one time
    thanking u
    and send me ur e-id

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  3. बहोत ही अच्छी रचना

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  4. वाह पहली बार पढ़ा आपको बहुत अच्छा लगा.
    आप बहुत अच्छा लिखती हैं और गहरा भी.
    बधाई.

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  5. आज पहली बार आपके ब्लाग पर आया हूँ
    एक अगल ही तरह की पढने को मिली
    बहुत अच्छी अभिव्यति है

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