कुछ ख्वाबों की राख
आज एक पुराने डब्बे मे मिली
नरम गुलाबी धागे से बंधे
कुछ पन्ने
और उन पर नीली स्याही से लिखे हुए
कुछ नगमे
आँख से टपके हुए अश्को के सूखे धब्बे
और मुरझाये हुए फूलो के कुछ बिखरे कतरे
सफ़ेद कागज़ पर पिरोये कुछ सुनहरे मोती
कुछ खत जो उसने मुझे लिखे थे कभी
एक कोने मे चाँदी की एक तन्हा पायल
और एक कढ़े हुए रुमाल मे दो सुरख लबो के निशान
इन कत्ल हुए ख्वाबों मे ज़िन्दा है कुछ अब भी
इक भीनी सी खुशबू
कुछ तेज़ धड़कने
और बन्द आँखो के पीछे
उसके प्यार की नमी

rajni its just out of the world ... dil ko chu gayi sach mein .... beautiful ...khas kar last ki chaar lines ... really
ReplyDeletethanku xitija :)
ReplyDeleteभावनाओं को शब्दों में बड़ी खूबसूरती से पिरोती हैं आप
ReplyDeleteवो अश्क ,वो तनहा-लम्हे ,वो खाक-ए-जमाना ,
ReplyDeleteकुछ-यादों की परछाइयाँ ,मिलकियत है इस जिंदगी की |
एक बहुत ही सुन्दर रचना | ये है कविता | बहुत-बहुत बधाई | धन्यवाद |
anil ji darshan ji shukriya
ReplyDelete